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सरकार में पांच रिक्त मंत्री पदों को न भरे जाने से विधायकों में पनप रहा असंतोष  

 

 

देहरादून। उत्तराखंड सरकार में पांच मंत्री पद पिछले काफी समय से रिक्त चल रहे हैं। वर्ष 2027 में राज्य में विधानसभा चुनाव होने हैं, ऐसे में रिक्त मंत्री पदों को न भरे जाने से भाजपा विधायकों में असंतोष बढ़ रहा है। विधायक सरकार पर खाली पड़े मंत्री पदों को
भरने के लिए दबाव बनाए हुए हैं। इसके अलावा पार्टी के कई बड़े नेताओं की नजर उन्हें सरकार में दायित्वधारी बनाए जाने पर है।
उत्तराखंड सरकार में इस समय मुख्यमंत्री के साथ छह कैबिनेट मंत्री हैं, जिनमें कि सतपाल महाराज, धन सिंह रावत, सुबोध उनियाल, गणेश जोशी, रेखा आर्य और सौरभ बहुगुणा शामिल हैं। वर्ष 2023 में तत्कालीन परिवहन मंत्री चंदन राम दास का निधन हो गया था, जबकि मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल को उनके विवादास्पद बयानों के चलते अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी थी। तीन मंत्री पद पहले से ही नहीं भरे गए थे। इस समय सरकार में कुल पांच मंत्री पद खाली चल रहे हैं। उत्तराखंड विधानसभा की 70 सीटें हैं, उनमें से मुख्यमंत्री सहित अधिकतम 12 सदस्य मंत्रिमंडल का हिस्सा हो सकते हैं। लंबे समय से खाली मंत्री पदों को न भरे जाने से अब पार्टी विधायकों का धैर्य जवाब देने लगा है। वे सरकार पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से मंत्री पदों को भरे जाने को लेकर दबाव बना रहे हैं, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। भाजपा के रणनीतियों पर बात करें तो साल 2022 में विधानसभा चुनाव से पहले यानी साल 2021 में नेतृत्व परिवर्तन कर दिया गया था, ताकि एंटी इनकंबेंसी को दूर किया जा सके। इस समय 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं, ऐसे में मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाएं तेज हैं। क्योंकि, अगर विधानसभा चुनाव से पहले मंत्रिमंडल का विस्तार होता है तो ऐसे में समय-समय पर नेतृत्व परिवर्तन की उठने वाली सुगबुगाहट पर न सिर्फ विराम लगेगी बल्कि, नाराज चल रहे नेताओं को भी मनाने में सरकार कामयाब हो सकती है।
भाजपा के कई विधायक अपनी ही सरकार से नाराज बताए जा रहे हैं। असंतुष्ठ विधायकों द्वारा अंदरखाने मुख्यमंत्री को बदलने की मांग की भी की जा रही है। विधायक व पूर्व मंत्री अरविंद पांडे ने तो मुख्यमंत्री के खिलाफ खुला मोर्चा खोला हुआ है। विधायक अरविंद पांडे समेत कई अन्य नेताओं की बयानबाजी से पार्टी संगठन असहज हो रहा है। पार्टी के कुछ सांसद भी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की कार्यशैली से नाराज बताए जा रहे हैं। असंतुष्ठ विधायकों को इन नाराज सांसदों का साथ मिल रहा है और वे पार्टी हाईकमान पर दबाव बनाना तेज कर रहे हैं। सरकार में दायित्वधारियों की चार सूची जारी हो चुकी हैं, लेकिन कई वरिष्ठ पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को स्थान नहीं मिल पाया है, जिस कारण वे भी सरकार से नाराज बताए जा रहे हैं।

 

 

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