“समान कार्य, समान वेतन” के मुद्दे पर भी संगठन ने कड़ा रुख अपनाया। शिष्टमंडल ने स्पष्ट किया कि विभिन्न सेवा स्रोतों से वर्षों से कार्य कर रहे कार्मिकों के साथ भेदभाव किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होगा। इस पर सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि एक उच्चस्तरीय समिति गठित कर समयबद्ध तरीके से समाधान निकाला जाएगा। इसके साथ ही विभिन्न विभागों में कार्यरत कार्मिकों को बिना कारण हटाए जाने और विभागीय संविदा के लिए जारी अनुबंध में संशोधन न होने के मामलों पर भी कड़ी आपत्ति जताई गई। हेमंती नंदन बहुगुणा चिकित्सा शिक्षा उत्तराखंड विश्वविद्यालय देहरादून में वर्षो से कार्यरत उपनल कार्मिकों का सर्विस ब्रेक करते हुए अनुबंध किया जा रहा है, जबकि राज्य सरकार कार्मिकों को यथावत रखने के निर्देश दिए। वहीँ उद्योग, खादी ग्रामोद्योग और ईएसआई विभागों से सम्बंधित प्रकरणों को गंभीर बताते हुए संगठन ने इसे कर्मचारियों के साथ अन्याय करार देते हुए कहा कि यदि कर्मचारी हित के विपरीत किसी विभाग में कार्य किया गया तो उस विभाग के अधिकारी को न्यायालय में पक्ष बनाया जाएगा। बैठक में महासंघ के महामंत्री विनय प्रसाद, सह-संयोजक हरीश कोठारी, महिला मोर्चा अध्यक्ष मीना रौथाण, अजय डबराल, रमेश डोभाल सहित कई पदाधिकारी मौजूद रहे।

