देवभूमि उद्यमिता केन्द्र के नोडल डॉ0 संजय महर ने बताया कि छात्र-छात्राओं को स्टार्ट-अप के लिए आइडिया क्रिएशन होना स्पष्ट जरूरी है। उन्होंने कहा कि किसी भी स्टार्ट-अप के लिए नवाचार, नवोन्मेष एवं उद्यमिता हेतु सृजनशीलता आवश्यक है तभी चुनौतियों के बीच जोखिम प्रबन्धन के माध्यम से उद्यमिता में सफलता हासिल की जा सकती है जिस हेतु इस कार्यशाला के माध्यम से छात्र-छात्राओं में उद्यमिता की भावना विकसित कर उनके हुनर को तलाशा जा रहा है। आइडियाज से आय तक, क्रिएटिव से कमाने तक, परफॉरमेंस से पहचान तक, उन्नयन से उद्योग तक, नवाचार से नवोन्मेश तक, युवा जोश से युवा उद्यमी बनने के सफर तक, रोजगार के रोडमैप से उद्यमिता के सफर की नई उड़ान तक, कौशल विकास से विकसित भारत की कल्पना तक, वोकल फॉर लोकल के सपने से वैश्विक बाजार तक और स्टार्ट-अप से स्टैंड-अप तक की दुनिया को जानते हुए सामर्थ्य से सशक्तीकरण एवं स्वावलम्बन तक की इस यात्रा के साक्षी बनें, का संदेश भी डॉ0 संजयमहर द्वाराछात्र-छात्राओं को दिया गया।
प्रशिक्षण के दौरान पर्यटन, होमस्टे, इकोटूरिज्म, औषधीय पुष्प, हर्बल शैम्पू, आई0टी0 में नवोन्मेष, उद्यम एवं वित्तीय प्रबन्धन के साथ ही उद्योग स्थापना की प्रक्रिया, उद्यमशीलता के गुण, सफल उद्यमी बनने के टिप्स, विपणन कौशल, उत्पाद गुणवत्ता, बाजार सर्वेक्षण, व्यवसाय विस्तार पर भी छात्र-छात्राओं का मार्गदर्शन किया गया। साथ ही स्टार्टअप एवं कौशल विकास पर भी जोर दिया गया एवं छात्र-छात्राओं द्वारा अपने आइडिया का भी प्रस्तुतिकरण दिया गया। मौके पर डॉ0 उमेश मैठाणी, डॉ0 राजपाल, डॉ0 सुशील, नताशा, सुधा रानी, डॉ0 सृचना सचदेवा, डॉ0 हिमांशु, डॉ0 आराधना, डॉ0 विजय प्रकाश, डॉ0 विक्रम, जितेंन्द्र नौटियाल, शिशुपाल, अजय, विशाल त्यागी, छात्र संघ अध्यक्ष राहुल, आशु सहित विभिन्न संकायों के 50 से अधिक छात्र-छात्रायें उपस्थित रहे।

