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पिता को मुखाग्नि देने बॉर्डर पर तैनात बेटे का पहुंचना था मुश्किल, बेटियों ने रूढ़िवादी परंपराएं तोड़ निभाया फर्ज

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पिथौरागढ़, 16 फरवरी। कई धर्मों में रूढ़िवादी परंपराएं अक्सर पारंपरिक मान्यताओं, रीति-रिवाजों और प्रथाओं को महत्व देती हैं. ये परंपराएं अक्सर तर्क या आधुनिकता को नकारते हुए आस्था और धारणाओं को बल देती हैं. लेकिन उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में दो बेटियों ने इन रूढ़िवादी परंपराओं को तोड़ बेटे के रूप में रस्मों को निभाया. अब ये बेटियां चर्चाओं में हैं. हर कोई इनकी सराहना कर रहा है.

दरअसल, पिथौरागढ़ के डीडीहाट विधानसभा क्षेत्र के बुंगाछीना के तोक खुलेती गांव के 54 वर्षीय रवींद्र लाल की 15 फरवरी की देर रात हृदय गति रुकने (हार्ट अटैक) से आकस्मिक निधन हो गया. रवींद्र लाल अपने पीछे पत्नी, दो बेटी प्रियंका, एकता और एक बेटा सचिन कुमार को छोड़ गए. जानकारी के मुताबिक, रवींद्र लाल का एक मात्र बेटा सचिन कुमार इंडियन तिब्बत पुलिस बल (ITBP) में सेवारत है. जिसकी पोस्टिंग वर्तमान में अरुणांचल के बॉर्डर इलाके में हैं.

पिता के निधन की सूचना सचिन कुमार को दी गई. लेकिन सचिन को अपने घर पिथौरागढ़ आने में तीन दिन का समय लग रहा था. जिससे परिवार के सामने दाह संस्कार करने की अड़चने आने लगी. जिसके बाद रवींद्र लाल की बड़ी बेटी 21 वर्षीय प्रियंका और छोटी बेटी 20 वर्षीय एकता आगे आईं और हिंदू रीति रिवाज की तमाम मर्यादाओं और सामाजिक रूढ़िवादी परंपराओं को तोड़ते हुए पिता की अर्थी को कंधा दिया.

रवींद्र लाल की बेटी प्रियंका और एकता ने न सिर्फ पिता की अर्थी को कंधा दिया बल्कि शव यात्रा में शामिल होकर चिता को मुखाग्नि देने का संकल्प भी लिया. इसके बाद रामगंगा और कोकिला नदी के संगम घाट पर प्रियंका और एकता ने गमगीन माहौल में पिता की चिता को मुखाग्नि दी और बेटे की कमी को पूरा कर अपना संकल्प और फर्ज निभाया. बेटियों द्वारा पिता की चिता को मुखाग्नि देने की परंपरा के बाद हर कोई दोनों बेटियों के साहस की प्रशंसा कर रहा है.

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