Advertisement Section
Header AD Image

सरकार ने ली तीन साल की शिवानी की जिम्मेदारी, अल्मोड़ा बस हादसे में माता-पिता की हो गई थी मौत

देहरादून, 5 नवम्बर। उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में सोमवार को हुए बस हादसे में 36 लोगों की मौत हुई है. वहीं 27 लोग घायल हैं, जिनका विभिन्न हॉस्पिटलों में उपचार चल रहा है. इन घायलों में कुछ लोग ऐसे भी हैं, जिनका इस हादसे ने सब कुछ छीन लिया है. ऐसी ही एक कहानी है तीन साल की शिवानी की. इस हादसे ने तीन साल की शिवानी को भी अनाथ कर दिया है. शिवानी के माता-पिता की भी इस हादसे में मौत हो गई. अब उत्तराखंड सरकार ने बच्ची की पूरी जिम्मेदारी लेने का फैसला किया है.

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस घटना पर गहरा दु:ख जताते हुए कहा कि उनकी सरकार शिवानी की देखभाल और शिक्षा की जिम्मेदारी उठाने का संकल्प लेती है. सीएम पुष्कर सिंह धामी ने X अकाउंट पर लिखा कि-

कल अल्मोड़ा के मार्चुला में हुए बस हादसे से हम सभी के हृदय को गहरा आघात पहुंचा है. इस कठिन समय में हमारी सरकार ने दुर्घटना में अपने माता-पिता को खोने वाली शिवानी बिटिया की देखभाल और शिक्षा की जिम्मेदारी उठाने का संकल्प लिया है, ताकि वह जीवन में आग बढ़कर स्वयं और माता-पिता के सपनों को साकार कर सके.

इस दु:खद घटना में जिन्होंने अपने परिजनों को खोया है, उनके प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं. एक मुख्यसेवक और परिवार के सदस्य के रूप में, मैं इस पीड़ा को समझता हूं. हमारा कर्तव्य है कि ऐसे विपरीत समय में एकजुट होकर प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहायता प्रदान करें और उन्हें जीवन को पुन: स्थिरता देने में अपना योगदान दें.

तीन साल की शिवानी के सिर से उठा माता-पिता का साया
तीन साल की शिवानी पौड़ी जिले के बिरखेत की रहने वाली है. शिवानी अपने पिता मनोज रावत और माता चारू देवी के साथ दीपावली पर अपने गांव आई थी. सोमवार चार नवंबर को शिवानी अपने माता-पिता के साथ बस में सवार होकर रामनगर के लिए निकली थी. लेकिन बीच रास्ते में बस खाई में गिर गई और शिवानी के माता-पिता की मौत हो गई. तीन साल की शिवानी भी इस हादसे में गंभीर रूप से घायल हुई है. हॉस्पिटल में उपचार करवा रही शिवानी को अभी तक ये भी नहीं पता है कि उसके माता-पिता अब इस दुनिया में नहीं रहे हैं. घायल शिवानी बार-बार अपने माता-पिता के बारे में पूछ रही है.

Previous post छात्रसंघ चनाव कराने के लिए ABVP के कार्यकर्ताओं ने प्राचार्य के माध्यम से कुलपति को सोंपा ज्ञापन, video
Next post हिंदी में 95% नंबर और ‘आवेदन पत्र’ नहीं लिख पाया डाक विभाग में चयनित शाखा डाकपाल